पिथौरागढ़

प्राचीन मन्दिरों के अवशेष एवं अभिलिखित नौला, गंगोलीहाट जनपद-पिथौरागढ़

यहां 6 मन्दिर, साधुओं की 6 समाधियां एवं एक अभिलिखित नौला है। इनमें से चार मन्दिर एक ही परिसर में है जबकि शेष दो मन्दिर तथा समाधि अलग से एक चारदीवारी के भीतर हैं। मन्दिर सामान्यतः त्रि-रथ आकार है जिनमें एक आगे की ओर एक छोटा आंगन निकला हुआ है। रेखा शिखर वाले ये मन्दिर भगवान विष्णु, शिव और सूर्य को समर्पित है। यह समाधियां सम्भवतः यहां निवास करने वाले साधुओं की रही होगी जो कालान्तर में बनायी गयी।

स्थानीय मन्दिरों के अलंकृत पत्थरों से निर्मित नौला अवस्थित है। नौले को ऊपर से एक सपाट छत वाले मंडप से ढका गया है, जिसके दोनों तरफ स्तंभ है। प्राप्त अभिलेख से तीन तिथियों का बोध होता है जो सम्वत् 1321 (1264 ई0), शक 1289 (1276ई0) तथा शक 1197 (1275 ई0) की हैं।

पाताल भुवनेश्वर गुफा, जनपद-पिथौरागढ़

यह प्राकृतिक गुफा भुवनेश्वर गांव से पहाड़ की ढाल पर 500 मीटर दूरी पर स्थित है। इस गुफा का धार्मिक महत्व स्कंदपुराण के ‘मानसखण्ड’ में किया गया है। मान्यता है कि आदि शंकराचार्य यहां आये थेे। गुफा के तल पर पहुंचने के लिए एक संकरे रास्ते से 20 मीटर नीचे घुटनों पर झुककर जाना पड़ता है। प्राकृतिक गुफा के भीतर कई संरचनाऐं बनी हुई हैं। इन संरचनाओं ने अलग-अलग आकार लिये हैं, जो स्थानीय लोगों द्वारा विभिन्न देवी-देवताओं से जोड़े गये हैं। यहां के मुख्य अराध्य भगवान भुवनेश्वर रूपी शिव हैं। कालांतर में यहां कुछ अन्य मूर्तियां स्थापित की गयी। गुफा के भीतर फर्श पर एक चैकोर तालाब काटा गया है जो कि सम्पूर्ण गुफा में एकमात्र मानवीय हस्तक्षेप क्रिया-कलाप है शेष गुफा प्राकृतिक है। गुफा के द्वार पर 14वीं शताब्दी ई0 का अभिलेख अंकित है।