संरक्षण

वर्ष 2003 में देहरादून मण्डल की स्थापना के बाद से संरक्षण के कई महत्वपूर्ण कार्य देहरादून मण्डल द्वारा कराये गये हैं जिनमें से प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-

क-सूर्य मन्दिर, कटारमल, जनपद अल्मोड़ा

पूर्वपश्‍चात
कटारमल ग्राम में स्थित मुख्य सूर्य मन्दिर काफी जर्जर अवस्था में था, मन्दिर के पिछले भाग में एक विशाल पीपल का वृक्ष था जिसने मन्दिर के स्थापत्य नमूनों के महत्वपूर्ण भागों को ढक एवं नष्ट कर दिया था तथा इससे मन्दिर को प्रतिदिन नुकसान हो रहा था।

मन्दिर के संरक्षण के लिए इस विशाल पीपल के वृक्ष को सावधानीपूर्वक हटाया गया तथा मन्दिर के स्थापत्य के नमूने अपने मूल रूप की भांति पुनः स्थापित किये गये। मुख्य मन्दिर के अतिरिक्त परिसर में अन्य लघु देवालयों की भी मरम्मत की गई तथा मन्दिर के प्रमुख प्रवेश द्वार की सीढि़यों जो पूर्व दिशा में थी तथा अज्ञात कारणों से मिट्टी में दबी थी, को संरक्षित करके खोला गया। इसके अतिरिक्त समय समय पर आवश्यकतानुसार परिसर में मन्दिरों का सरंक्षण एवं परिरक्षण किया जाता रहा है।

ख-रूद्रनाथ/गोपीनाथ मन्दिर, गोपेश्वर जनपद चमोली

पूर्वपश्‍चात
यहां पर देहरादून मण्डल द्वारा किये गये संरक्षण के अन्तर्गत मन्दिर परिसर की छोटी दीवार को लोहे की ग्रिल लगाकर मजबूत चारदीवारी बनाई गई । मन्दिर के आन्तरिक एवं बाहरी भाग को सुदृढ़ किया गया, तथा मुख्य मन्दिर के मण्डप को पुनः स्थापित किया तथा मन्दिर परिसर में पत्थर का फर्शीकरण किया गया इसके अतिरिक्त मन्दिर के निकट स्थित रावल निवास जो कि अत्यन्त जीर्ण-क्षीर्ण अवस्था में था उसे अपने मूल स्वरूप के अनुरूप पुनः स्थापित किया गया।

ग- जागेश्वर मन्दिर समूह, जागेश्वर जनपद अल्मोड़ा

पूर्वपश्‍चात
यहां पर देहरादून मण्डल द्वारा किये गये संरक्षण के अन्तर्गत जागेश्वर समूह के मन्दिरों को एक चारदीवारी बनाकर सुरक्षित किया गया। मन्दिर के सामने पूर्व में निर्मित एक धर्मशाला का काफी बड़ा हिस्सा हटाया गया। मन्दिर प्रांगण में स्थित अन्य लघु देवालयों का भी संरक्षण किया गया। जागनाथ मन्दिर के प्रवेश द्वार के मुख्य सरदल को रेट्रोफिटिंग के माध्यम से संरक्षित किया गया है। पुराने और खराब हो चुके पत्थर के फर्श का पुर्नोद्धार किया गया जिससे मन्दिर परिसर को एक भव्यता पुनः प्रदान की जा सकी।

घ-चांदपुर गढ़ी, खाल, जनपद चमोली

पूर्वपश्‍चात
यहां पर देहरादून मण्डल द्वारा किये गये संरक्षण के अन्तर्गत 2003 में मण्डल कार्यालय बनने के बाद बड़े स्तर पर संरक्षण का कार्य किया गया। चांदपुर गढ़ी गढ़वाल के प्राचीनतम किलों में है जो कि पूर्णतः जर्जर अवस्था में था और स्थापत्य का बड़ा हिस्सा मिट्टी व पत्थरों अपने में दफन था। स्थापत्य का काफी हिस्सा वैज्ञानिक ढंग से की गई सफाई से प्रकाश में आ चुका है तथा स्थल पर उपलब्ध प्रस्तर सामग्री द्वारा संरक्षित किया गया है। पहाड़ की चोटी पर स्थित मुख्य परिसर का भी संरक्षण किया गया है।

ड- शिव मन्दिर लाखामण्डल, जनपद देहरादून

पूर्वपश्‍चात
देहरादून मण्डल द्वारा किये गये संरक्षण के अन्तर्गत जौनसार बावर क्षेत्र में स्थित शिव मन्दिर, लाखामण्डल एक महत्वपूर्ण देवालय है, जिसके संरक्षण का कार्य देहरादून मण्डल द्वारा किया गया। मुख्य मंदिर के संरक्षण के अतिरिक्त इसके परिसर में अन्य लघु देवालयों की खोज ने यहां के मन्दिर स्थापत्य के इतिहास को एक नया आयाम दिया है। इसके अतिरिक्त सम्पूर्ण मन्दिर परिसर की लघु दीवार का निर्माण एवं रेलिंग से घेराबन्दी की गई है।