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देहरादून मण्डल
देहरादून मण्डल पर 42 राष्ट्रीय सुरक्षित धरोहरों को संरक्षित करने का दायित्व है। मण्डल को उत्तराखण्ड राज्य में वृहद पुरातात्विक गतिविधियों को कराने की जिम्मेदारी भी है। मण्डल कार्यालय गाँव-गाँव में सर्वेक्षण, खोज, संरक्षण, परिरक्षण, प्रबन्धन और सामान्य रख-रखाव जैसे कार्यों को निष्पादित करता है। ...
 
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स्मारक
'प्राचीन स्मारकों' से तात्पर्य है कि कोई प्राचीन मन्दिर, मस्जिद, गिरजाघर, गुरूद्वारा, कब्रिस्तान, मकबरा, इमामबाड़ा, ईदगाह, हमाम, कर्बला, किला, प्राचीन कुएं (बावड़ी/नौले), ऐतिहासिक तालाब व घाट, महल, हवेली, धर्मशालाएं, प्राचीन द्वार, मानव निर्मित गुफाएं, स्तम्भ, उत्कीर्ण प्रतिमाएं, छतरि...
 
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उत्खनन
काशीपुर की पहचान अलेक्जेंडर कनिंघम ने ह्वेनसांग के क्यू पीं स्वंगना से की है जिसे संस्कृत में जूलियन ने गोविषाणा कहा है। सर अलेक्जेण्डर कंनिंघम ने यहां के सबसे ऊंचे स्थल भीम गजा में बहुत बड़ी वास्तु संरचना की खोज ....
 
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संरक्षण
वर्ष 2003 में देहरादून मण्डल की स्थापना के बाद से संरक्षण के कई महत्वपूर्ण कार्य देहरादून मण्डल द्वारा कराये गये हैं जिनमें से प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-
क-सूर्य मन्दिर, कटारमल, जनपद अल्मोड़ा कटारमल ग्राम में स्थित मुख्य सूर्य मन्दिर काफी जर्जर अवस्था में था, मन्दिर के पिछले भाग में एक विशाल पीपल का वृक्ष था जिसने मन्दिर के स्थापत्य नमूनों के महत्वपूर्ण भागों को ढक एवं नष्ट कर दिया था तथा इससे मन्दिर को प्रतिदिन नुकसान हो रहा था...
 

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